कल रात एक किताब ऑनलाइन ऑर्डर करना चाह रही थी। प्रकाशक पाकिस्तान लाहौर में हैं। मैंने ऑर्डर किया। किताब की क़ीमत थी पाकिस्तानी 600 रुपए। मुझे लगा बहुत हुआ तो हज़ार रुपए हिंदुस्तानी देने होंगे। आज जवाब आया कि किताब तो 14 दिन में पहुंच जाएगी लेकिन इसके लिए देने होंगे 24 US $.।
मैंने फिर अमेज़न पर देखा तो एक और बड़ा झटका लगा। वहां इस किताब की क़ीमत दिखी $ 60.35.
अचानक मुझे तीन साल पहले लाहौर के अनारकली बाज़ार का वो वाकया याद आ गया जहां मैं एक जोड़ी झुमके की क़ीमत 1200 रुपए चुका रही थी। मैंने पूछा-भाई हमारे यहां तो ये तीन चार सौ रुपए में मिल जाएंगे। भाई बोला-बाजी आप ठीक कह रही हैं। आपके यहां तो इतने के ही मिलेंगे लेकिन हम तक तो ये वाया दुबई पहुंचे हैं, अब आप देखिए ये झुमके कहां से कहां होते हुए यहां तक पहुंचे हैं।
दोनों बातें मुझे हैरान करती हैं , बहुत हैरान।
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