कभी दिन यूं भी निकलता है कि बेवजह उदासी घिरी रहे। आप बाज़ार जाएं और बिना कुछ ख़रीदे वापस आ जाएं। लोगों से बात करें पर ये याद तक न रहे कि सिलसिला क्या है। जैसे आप हों या और न भी हों। कभी यूं भी लगे कि आंख बस अब छलकी। ज़ब्त किए आप दिन गुज़ार देते हैं। सारे काम करते हैं। और तभी पता चलता है कि एक इंसान जिसे आप जानते तक नहीं थे, ये सारी उदासी उसकी वजह से थी।
आज ऐसा ही हुआ। सुबह से उदासी तारी रही। हालांकि सारे काम किए लेकिन तो भी, बेकली बनी रही। अभी कुछ देर पहले पता चला कि सैय्यद हैदर इमरान रिज़वी नहीं रहे। मैं उन्हें जानती नहीं थी। उनकी वॉल पर जाकर देखा तो पता चला कि उन्होंने कभी मुझे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी जो मेरे पास पेंडिंग थी। वॉल पर ढेर सारे शोक संदेश थेे। इमरान इस दुनिया से जा चुके हैं। वे जॉनपुर के थे और कुछ ही दिन पहले दिल्ली आए थे।
मैंने उनकी तस्वीर देखी। एक ज़िंदादिल सा दिखता युवक। जो अब जा चुका है।
...तो आंख में दो आंसू इस नाम के थे आज दिन भर से ...? शायद हां ।
इमरान की वॉल पर ऊपर मुझे नज़र आ रहा था -
सैय्यद हैदर इमरान रिज़वी सेंट यू ए फ्रेंड रिक्वेस्ट - कंफर्म/डिलीट
दोस्त ....मैंने आपकी रिक्वेस्ट कंफर्म कर दी। हालांकि अब इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, फिर भी ।
अलविदा सैय्यद हैदर इमरान रिज़वी ।
आज ऐसा ही हुआ। सुबह से उदासी तारी रही। हालांकि सारे काम किए लेकिन तो भी, बेकली बनी रही। अभी कुछ देर पहले पता चला कि सैय्यद हैदर इमरान रिज़वी नहीं रहे। मैं उन्हें जानती नहीं थी। उनकी वॉल पर जाकर देखा तो पता चला कि उन्होंने कभी मुझे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी जो मेरे पास पेंडिंग थी। वॉल पर ढेर सारे शोक संदेश थेे। इमरान इस दुनिया से जा चुके हैं। वे जॉनपुर के थे और कुछ ही दिन पहले दिल्ली आए थे।
मैंने उनकी तस्वीर देखी। एक ज़िंदादिल सा दिखता युवक। जो अब जा चुका है।
...तो आंख में दो आंसू इस नाम के थे आज दिन भर से ...? शायद हां ।
इमरान की वॉल पर ऊपर मुझे नज़र आ रहा था -
सैय्यद हैदर इमरान रिज़वी सेंट यू ए फ्रेंड रिक्वेस्ट - कंफर्म/डिलीट
दोस्त ....मैंने आपकी रिक्वेस्ट कंफर्म कर दी। हालांकि अब इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, फिर भी ।
अलविदा सैय्यद हैदर इमरान रिज़वी ।