मां ने पूछा-मंहगाई बढ़ती है तो अब लोग सड़कों पर क्यों नहीं निकलते? हमारे ज़माने में तो लोग हंगामा किया करते थे। महंगाई पर तो फिल्म तक बनी थी रोटी कपड़ा और मकान...। बात छोटी पर सच थी। हम सचमुच चुप रहते हैं। जुल्म होते देखकर भी, सहकर भी चुप रहते हैं। इसमें मैं भी शामिल हूं। हम सब एक बड़ी चुप का हिस्सा चुपचाप बनते जा रहे हैं।
चलिए चित्तूर पर भी चुप रहते हैं।जैसे इससे पहले चुप रहते आए हैं।